गिरिराज किशोर का निधन

नयी दिल्ली : 10 फरवरी 2020:  कल सुबह हमारे समय के बड़े कथाकार और विचारक गिरिराज किशोर का इंतकाल हम सबके लिए बेहद दुखदायी ख़बर है| एक लंबा और सार्थक जीवन जीने वाले गिरिराज जी 90 वर्ष की अवस्था में भी पूरे सक्रिय थे| उनकी रचनात्मकता अबाधित थी और मौजूदा सरकार की तानाशाही की आलोचना करने में भी वे कभी पीछे नहीं रहते थे| इस उम्र में वे फेसबुक जैसे माध्यम के साथ जितने सहज थे और राजनीतिक टिप्पणियों के लिए उसका जिस तरह इस्तेमाल करते थे, वह आश्चर्यजनक और प्रशंसनीय है।

गिरिराज जी ने विपुल लेखन किया है| आरम्भ में ‘पेपरवेट’ की कहानियों और फिर ‘इंद्र सुनें’, ‘यथा प्रस्तावित’, ‘ढाई घर’ जैसे उपन्यासों के माध्यम से उन्हें ख्याति मिली| 2010 में प्रकाशित ‘पहला गिरमिटिया’ ने उनके साहित्यिक क़द को और ऊंचा कर दिया| 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले गिरिराज जी बाद में व्यास सम्मान, पद्मश्री आदि अनेक सम्मानों-उपाधियों से नवाज़े गये|

जनवादी लेखक संघ श्री गिरिराज किशोर के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता है और दिवंगत रचनाकार को श्रद्धा-सुमन अर्पित करता है|


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